06 अप्रैल 2010

दन्तेबाड़ा में नक्सलीयों ने अपने एक और विभत्स रूप का परिचय देते हुए 74 जवानों को मौत के घाट उतार दिया।

दन्तेबाड़ा में नक्सलीयों ने अपने एक और विभत्स रूप का परिचय देते हुए 74 जवानों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना कें बाद जहां गृहमन्त्री मुंहतोड़ जबाब देने की बात कह रहे है वहीं शहीद जवानों की इस तरह हो रही हत्या की जिम्मेवारी लेने वाला कोई नज़र नहीं आता। गृहमन्त्री चिदबरंम मिडिया कें माध्य से हमेशा यह बयान देते रहे है कि नक्सलीयों निवटा जाएगा पर 81 जवानों को सुनियोजित तरीके से घेर कर 74 जिस तरह हत्या कर दी और उनके  हथियार लूट लिए गए लगता है कि गृहमन्त्री महज जुबानी जमा खर्च के सहारे नक्सली से निवटने की बात करते है। यदि ऐसा नहीं तो धंटों चले इस मुटभेड़ में कोई सहायाता नहीं पहूंचना और 1000 हजार नक्सली को गुम हो जाना क्या बताता है।  क्या ऑपरेशन ग्रीनहंट  जवानों को शहीद करने के लिए चलाया गया है। 

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...