26 अप्रैल 2010

कि फिर आऐगी सुबह



हर सुबह एक नई उम्मीद लाती है


खब्बो से निकाल


हमको जगाती है




अब शाम ढले तो उदास मत होना


उम्मीदों कों सिरहाने रखकर तुम चैन से सोना


कि फिर आऐगी सुबह


हमको जगाऐगी सुबह


रास्ते बताऐगी सुबह


उम्मीदों कें सफर को मंजिल तक पहूंचाऐगी सुबह.................

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...