14 फ़रवरी 2014

अच्छा लगता है...(वेलेन्टाइन स्पेशल)

यूँ ही बिना वज़ह हसरतों का मचलना।
यूँ ही बिना वज़ह गुलों का खिलना।।
अच्छा लगता है।

यूँ ही खुशबू की तरह बिखरना।
यूँ ही झरनों की तरह गिरना।
अच्छा लगता है।

यूँ ही भौरें की तरह मचलना।
यूँ ही परवाने की तरह जलना।
अच्छा लगता है।

यूँ ही आहें भरना।
यूँ ही रात भर जगना।
अच्छा लगता है।

यूँ ही किसी के ख्वाबों में खोना।
यूँ ही किसी की आगोश में होना।
अच्छा लगता है।

यूँ ही किसी का दर्द सहना।
यूँ ही किसी का बनना।
अच्छा लगता है।

यूँ ही किसी पे मरना।
यूँ ही किसी से प्यार करना।
अच्छा लगता है।

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 15/02/2014 को "शजर पर एक ही पत्ता बचा है" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1524 पर.

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  2. आपका लिखा पढ़ना हमेशा अच्छा लगता है

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  3. यूँ ही किसी को देख
    पल भर धडकनो का बंद होना
    यूँ ही किसी की सुगंध
    श्वास-श्वास में कस्तूरी सी
    घुल जाना अच्छा लगता है !

    यह तो सिर्फ टिप्पणी स्वरुप है आपकी रचना बहुत सुन्दर है :)
    प्रेम जीवन को अर्थपूर्ण बना देता है , आभार आपका !

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  4. प्यार की खुबसूरत अभिवयक्ति.......

    जवाब देंहटाएं
  5. सुन्दर- स्वाभाविक भाव-व्यंजना !

    जवाब देंहटाएं

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