23 फ़रवरी 2014

सूरज और मैं

रोज रोज मद्धिम सा
लाल-पीला
हर घर, हर देह पर
पड़ती है धूप.....

सुबह में शीतल
दोपहर में गर्म
और शाम में फिर शीतल...

और फिर रात्री विश्राम
जिसमें होता है अंधेरे का साम्राज्य
और फिर सूरज निकलता है
यह जीवन चक्र
और मैं
जाने क्ंयू
अपनापा सा लगता है
कुछ कुछ...

रंडीबाज

रंडीबाज (लघुकथा, एक कल्पकनिक कथा। इस कहानी से किसी व्यक्ति या संस्था को कोई संबंध नहीं है) चैत के महीने में अमूमन बहुत अधिक गर्मी नहीं होत...