18 मार्च 2015

शून्य की एक तस्वीर...



शून्य की ओर निहारती इस तस्वीर को जब से मैंने कैद किया तब से सोंच रहा हूँ कि संत ऐसे ही तो होते होंगे ...

जाने क्यों बुजुर्ग के इस चेहरे में मुझे किसी संत के होने की झलक मिलती है ।

----

शून्य हो जाना 

संत हो जाना है

सुख.दुःख 

आकांछा

अभीप्सा

और

मान.अपमान 

के आदम दुर्गुणों

से दूर होना

आदमी का संतत्व है ....

एक भूमिहार ब्राह्मण रमेश सिंह भला भूख से कैसे मर सकता है...? सबका यही सवाल..

( मैं हूँ ट्विटर पे @arunsathi ) घटना उद्वेलित भी करती है और उद्विग्न भी। मंगलवार की शाम जब यह खबर मिली की भूख और आर्थिक तंगी की वजह से शे...