17 अगस्त 2010

.सूखे के गम को भुलाने का गालीब ख्याल अच्छा है.

सुखाड है तो क्या हुआ... शराब है ना. झमाझम बारिस में जहां किसान खेतों में देने उर्वरक ले जाते... वहीं सूखे ने इसपर पानी फ़ेर दिया है... पर हाय रे नीतीश कुमार की सरकार .....उर्वरक की जगह बरसात में बोरे में भर कर शराब जा रही...........सूखे के गम को भुलाने का गालीब ख्याल अच्छा है. के गम को भुलाने का गालीब ख्याल अच्छा है.................जय हो..... सुशासन की........

मौत से लड़कर रोहित का चला जाना गम दे गया...

मौत से लड़कर रोहित का चला जाना.. गम दे गया.. (अरुण साथी) मुझे ऑक्सीजन की जरूरत है, कहाँ मिलेगा.…..तकलीफ हो रही है...रोहित का कॉल। एक लड़खड़ात...