28 अगस्त 2010

चुनाव लोकतन्त्र की सबसे बड़ी ताकत-हरिमोहन मिश्र (दैनिक भाष्कर के दिल्ली संस्करण संपादक )



चुनाव लोकतन्त्र की सबसे बड़ी ताकत है और यह आम आदमी को सत्ता के सिंहासन पर पहूंचाने का काम करती है, यह बात दिगर है कि सत्ता पर काबीज होने के बाद लोग उसका दुरपयोग करते है या उपयोग। उक्त बातें दैनिक भाष्कर के दिल्ली संस्करण संपादक हरिमोहन मिश्रा ने कही। श्री मिश्रा शेखपुरा में लोकतन्त्र और चुनाव विषयक गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि अमेरिका का लोेकतन्त्र पुंजीवादी लोकतन्त्र है और ओबामा उसका मुखौटा, बबाजूद इसके ओबामा के द्वारा इंस्योरेंस बिल पास करबाना पुंजीबादियों की हार है। उन्होंने कहा कि लोकतन्त्र में चुनाव जनता को सबसे बड़ी ताकत देती है जिसकी वजह से मायावती आज मुख्यमन्त्री बनी हुई है। चुनाव आम आदमी को संवाद का मौका देती है और चौक-चौराहे पर राजनीति की चर्चा होती है। श्री मिश्रा ने साफ कहा कि भारतीय लोकतन्त्र भी पुंजीवाद से प्रभावित है और इसी का परिणाम है कि 60 प्रतिशत सांसद कारोड़पति है जिन्हें यह बात पता है कि सत्ता पैसा पैदा करती है और वह पैसा उनकी जेब में जाता है। इसी का नजीता है कि  आपराधियों का एक बड़ा वर्ग राजनीति की शरण में आकर पैसा बना रहा है। अपने संबोधन में श्री मिश्रा ने कहा कि राजीतिज्ञों में वैचारिक रूप से एका है और सांसदों के वेतन के मामले मेंं सभी ने इसे सही ठहरा दिया। आज देश के पास पर्यावरण सहित अन्य महत्वपूर्ण मुददों पर कठोर कदम उठाने वाले राजनेता नहीं है। गोष्ठी को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव जितेन्द्र नाथ ने कहा कि पुंजीवादी लोकतन्त्र को मारना चाहता है और यह संधर्ष सालों से चलता आ रहा है। इस सन्दर्भ में उन्होनें भगवान बुद्ध को उदृत करते हुए कहा कि जब वैष्णववाद के खिलाफ बुद्ध ने हुंकार भरी तो इसी ताकत के बल पर चार पीठ बना कर बुद्ध को भी विष्णु का अवतार धोषित कर दिया गया। जितेन्द्र नाथ ने कहा कि आज आठ लाख इंजिनियर प्रति वर्ष पैदा हो रहा है और दस साल के बाद इंजिनियर तेल बेचने का काम करेगें और इसका उदाहरण बिहार सरकार की नियोजन नीति है। गोष्ठी में बोलते हुए आर. डी. कॉजेल के प्राचार्य  भगवती शरण सिंह ने उदारीकरण को विकास का प्रर्याय बताते हुए कहा कि आर्थिक उदारीकरण से ही आज देश का विकास हुआ है और बेरोजगारी की समस्य घटी है तथा युवा एमबीए कर विदेश में नौकरी कर रहें है। गोष्ठी में पत्रकार संजय मेहता, निरंजन कुमार, अरविन्द कुमार, रंजीत कुमार, मनोज कुमार मन्नू, दीपक कुमार, संजीत तिवारी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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