सुदूर गावों में दो वक्त की रोटी वमुश्किल मिलती है। इसी रोटी की खातिर बांस, फूस और मिट्टी से दुकान बनाती एक महिला।
और मेरे चाँद शब्द......
जिंदगी तुम हो तो क्या तुम हो।
जी कर तुझे, तेरी औकात बताते है हम।।
सिर्फ महलों में तेरा बसेरा नहीं।
झोपड़ियों में भी तुझे खींच लाते है हम।।
मार्मिक अभिव्यक्ती
जवाब देंहटाएंआभार आपका
जवाब देंहटाएंहौसला बढ़ाने के लिए आभार
जवाब देंहटाएंहौसला बढ़ाने के लिए आभार
जवाब देंहटाएंलाजबाब प्रस्तुति...!
जवाब देंहटाएंRECENT POST -: पिता