01 जनवरी 2014

गावं जवार से ....किसान गीत के साथ, साथी की ओर से...नववर्ष मंगलमय हो..


पेट भरू सबका, खुद भूखा सोउ
मन ही मन घुट-घुट मैं रोउ
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कभी मेरे लिए भी सूरज निकले
मेरे खेतों में भी सोना उपजे
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कभी कहो खेत, किसान,
मजदूर की जय हो
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कभी एक मुट्ठी खुशी
अपने लिए भी तय हो
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तब मैं भी कहूं सबको
नववर्ष मंगलमय हो
नववर्ष मंगलमय हो...



कविवर को नमन

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है हो जाये अच्छी भी फसल...