01 जनवरी 2014

गावं जवार से ....किसान गीत के साथ, साथी की ओर से...नववर्ष मंगलमय हो..


पेट भरू सबका, खुद भूखा सोउ
मन ही मन घुट-घुट मैं रोउ
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कभी मेरे लिए भी सूरज निकले
मेरे खेतों में भी सोना उपजे
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कभी कहो खेत, किसान,
मजदूर की जय हो
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कभी एक मुट्ठी खुशी
अपने लिए भी तय हो
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तब मैं भी कहूं सबको
नववर्ष मंगलमय हो
नववर्ष मंगलमय हो...



एक भूमिहार ब्राह्मण रमेश सिंह भला भूख से कैसे मर सकता है...? सबका यही सवाल..

( मैं हूँ ट्विटर पे @arunsathi ) घटना उद्वेलित भी करती है और उद्विग्न भी। मंगलवार की शाम जब यह खबर मिली की भूख और आर्थिक तंगी की वजह से शे...