05 जनवरी 2014

निगोड़ी भूख और गरीब का बच्चा.

(एक आंगनबाड़ी केन्द्र पर खबर बनाने के दौरान बच्ची की यह तस्वीर खिंची और बरबस ही शब्दों ने कविता का रूप ले लिया...)

कोई पिज्जा नहीं खाता, कोई बर्गर नहीं खाता।
हमारी भूख कैसी है? यह सबकुछ निगल जाता।।

तुम्हारे देह पर सजते है सुनहरे ड्रेस रंगीले।
हमे तो देह ढ़कने को फकत गुदड़ी ही मिल पाता।।

तुम्हारे पुस्तकों में भी खनक सिक्कों की होती है।
हमे तो काली सिलौटों को फकत पेल्सुट न मिल पाता।।

हमारा  दोष क्या है जी, खुदा के हम भी बच्चें है।
तुम्हारी हंसी नहीं थमती, हमें तो अब रोया भी नहीं जाता.....

एचएम और शिक्षक सरकारी स्कूल में पी रहे थे ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर

सरकारी स्कूल में नशीला पदार्थ आया ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर शेखपुरा बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल है। सरकारी स्कूल में प्रधानाध्...