24 जनवरी 2014

मैं नास्तिक हूँ ?

मैं मंदिर नहीं जाता
न ही भोर में
जलाकर धूप
बजाकर घंटी
अपनी आस्तिकता का
पीटता हूँ ढोल...

न ही मैं पांचों वक्त नमाजी
या कि हाजी
होने का गुरूर
दिखता हूँ हर जगह...

या की चर्च में
कन्फेशन कर
फिर से वही
दुहराता हूँ...

न ही गुरूद्वारे में
टेक कर मथ्था
वाहे गुरू को
झुठलाता हूँ...

पर हाँ
जब भी कहीं
अनैतिकता
अनाचार
की बात आती है
मेरी आस्तिकता
ही मुझे बचाती है...

एक भूमिहार ब्राह्मण रमेश सिंह भला भूख से कैसे मर सकता है...? सबका यही सवाल..

( मैं हूँ ट्विटर पे @arunsathi ) घटना उद्वेलित भी करती है और उद्विग्न भी। मंगलवार की शाम जब यह खबर मिली की भूख और आर्थिक तंगी की वजह से शे...