29 जनवरी 2014

यक्ष प्रश्न...


















यक्ष की तरह
आकर खड़ा हो जाता हूँ मैं
खुद के ही सामने
पूछने लगता हूँ सवाल
उसी तरह
जैसे, लगा हो दांव पर
अपना ही जमीर...

और मैं ही हो जाता हूँ
निरूत्तर
निःशब्द
निविर्य
आदमी हूँ ?
जीता  हूँ जहां
उस धरा को

क्या देकर जाउंगा ?
क्या देकर जाउंगा ?

भक्त नाराज है..मन की बात कहिये नहीं, मन की बात सुनिए..

बीजेपी के विरोध में पोस्ट करते थे तो जो भक्त मित्र तर्क कुतर्क के साथ लड़ाई झगड़े पे आ जाते थे आज वे नाराज है। वे सवर्ण समाज के मित्र है। चाय ...