02 जनवरी 2016

स्वयं को नया करें-ओशो


आचार्य रजनीश "ओशो" कहते है, दिन तो रोज ही नया होता है लेकिन रोज नया दिन नहीं देख पाने के कारण हम बर्ष में कभी कभी दिन को नया देखने की कोशिश करते है। यह स्वयं को देखा देने की तरकीबों में से एक तरकीब है।

जिसका पूरा बर्ष पुराना हो उसका एक दिन नया कैसे हो सकता है। नया मन जिसके पास हो उसका कोई दिन पुराना नहीं हो सकता है। नया मन हमारे पास नहीं है तो हम चीजों को नया करते है। जबतक जो नहीं मिला, नया होता है। मिलते ही पुराना हो जाता है।

जो स्वयं को नया कर लेता है उसके लिए कोई चीज पुरानी होती ही नहीं। भौतिकवादी चीजों को नया करता है और अध्यात्मवादी स्वयं को नया करता है।

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मौत से लड़कर रोहित का चला जाना.. गम दे गया.. (अरुण साथी) मुझे ऑक्सीजन की जरूरत है, कहाँ मिलेगा.…..तकलीफ हो रही है...रोहित का कॉल। एक लड़खड़ात...