18 दिसंबर 2009

कहानी फ्राइडे पढ़ने के बाद,

आदरणीय अजीत जी
प्रमुख न्यूज 24
उनकी कहानी फ्राइडे पढ़ने के बाद,
सादर प्रणाम
बिहार के शेखपुरा जिला के बरबीघा प्रखण्ड से यह पत्र मैं आपको लिख रहा  है। लिखने का खास कारण यह कि पटना पुस्तक मेला से ``वक्त है एक ब्रेक का´´ नामक पुस्तक को खरीदा। पुस्तक को खरीदने का मुख्य कारण मिडिया से मेरा जुड़ाव ही था। मैं शेखपुरा जिला से साधना न्यूज के लिए स्टींगर का काम करता हूं साथ ही अखबारों में समाचार प्रेषण से जुड़ा हूं। ईमेल से यह पत्र भेजना चाहता था पर मेल पता गलत था सो नहीं जा सका। आपके न्यूज 24 चैनल का नियमित दशक हूं। पुस्तक में आपकी कहानी फ्राइडे पढ़ी। पढ़ कर खुशी भी हुई और दुख भी। खुशी यह जानकर की रेलमपेल की जिंदगी में भी अपनी भावनाअो को उकरने में आपने ईमानदारी दिखाई है और एक यथार्थ को सामने लाया है, दुख यह जानकर की ड्रग्स एडिक्ट पत्रकारिता के लिए कोई ड्रोप टेस्ट आज नहीं है। दुख इस बात का भी कि सबकुछ जानकर भी आज हम भीष्म पितामह की भूमिका में आ गए है। किसी को पाण्डव बनना होगा। इस व्यथा पर ही शायद दिनकर जी ने लिखा होगा समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्यध्र, जो तटस्थ है समय लिखेगा उसका भी अपराध! आज दिल्ली से दूर छेटे से कस्बे मेंभी पत्रकारिता को लेकर यही मारकाट है। जैसे तैसे लोग पत्रकार बन कर उगाही करने का काम कर रहें है। पत्रकारिता का कोई आदश हमारे सामने नहीं? जन सारोकार आपके चैनलों पर भी नजर नहीं आता दोषी कौन।
बस इतना ही
प्रणाम
अरूण साथी

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