01 फ़रवरी 2010

ग्रामीण बैंक शेखोपुर में लाखों का घोटाला, बाप किसान और बेटा बटाइदार

बिहार क्षेत्रिये ग्रामीण बैंक शेखोपुरसराय की शाखा वानगी है किस तरह
नज़राने के लिए नियम और कानून को जेब में रख लिया जाता है। इस बैंक के
ंशाखा प्रबंधक के द्वारा भी नियम और कानून को जेब में रख कर मनचाहे लोगों
को ऋण दिया। इसकी एक झलक देखे। मनोज कुमार ग्राम अंबारी का किसान केडिड
कार्ड खाता संख्या 383 में एक तरफ इन्हें किसान का लाभ दिया गया जबकि एक
साल पूर्व मनोज कुमार को खाता संख्या 02/08 के माध्यम से 150000 का लाभ
व्यापारी के रूप में सीसी खाता का दिया जा चूका था। मनोज कुमार से सीसी
करने के नाम पर 45000 का फिक्सड डिपोजिट करने के लिए कहा गया और यह राशि
भी मनोज कुमार के द्वारा दिया गया पर आज तक इस राशि का कोई अता पता नहीं।
जब मनोज कुमार इसकी खोज खबर लेने का प्रयास किया तो शाखा प्रबंधक नाराज
हो गए तथा उनके उपर मुकदमा कर दिया। एक और उदाहरण अरूण कुमार ग्राम
अंबारी। सरकार घोषणाओं के आधार पर लगाए गए शिविर में इनको किसान केडीड
कार्ड खाता संख्या 480/09 31 जनवरी 2009 को यह कह कर दे दिया गया कि उनका
केसीसी ऋण स्वीकृत कर लिया गया। अरूण कुमार को ंशाखा प्रबंधक ने बताया कि
3 ऐकड़ जमीन के आधार पर 38000 का ऋण स्वीकृत किया गया। जब अरूण कुमार
शिविर से लौट कर बैंक में स्वीकृत राशि निकालने के लिए गए तो उन्हें
ंशाखा प्रबंधक से मिलने के लिए कहा गया और वहां उनसे 5000रू0 की मांग की
गई जब वे देने से इंकार कर दिया तो आज तक उनके पासबुक से राशि निकालने
नहीं दी जा रही है। वहीं चन्दन कुमार और सनोज कुमार ग्राम अंबारी को नियम
को ताक पर रख कर एक मुश्त 50000 की राशि एक बार दे दी गई जबकि नियमानुसार
किसान को इतनी बड़ी राशि एक बार खेती के लिए जरूरत नहीं पड़ती है। अरूण
कुमार कहते है कि किसानों की यह योजना अधिकारियों की जेब भरने के लिए है।
उदाहरण तीन ंशेखोपुरसराय बजार के राकेश कुमार एवं विनय कुमार यादव ने
फिक्सड डिपोजिट किया और उन्हें बिना हस्ताक्षर का कागज थमा दिया गया।
उदाहरण चार गीता देवी पति अजूZन सिंह को 50000 की राशि केसीसी ऋण के रूप
में दे दिया गया जबकि उनके द्वारा लैण्ड पोजिशन प्रमाण पत्र जनवरी में
बना कर दिया गया। यानि बिना जमीन के ही किसान बनी गीता देवी। इतना ही
नहीं गीता देवी को किसान होने का लाभ तो दिया ही गया वहीं उनके बहू को
उसी जमीन पर बटाईदार बना कर उसका लाभ देने के लिए ऋण दे दिया गया। यानि
नियम-कानून ताक पर। नियम कानून ताक पर रखे जाने का उदाहरण पांच मनोज
कुमार ग्राम अंबारी का खाता ऋण शिविर में खोला गया केसीसी खाता संख्या
405/09 पास बुक भी जारी कर दिया गया और जब नज़राना नहीं दिया गया तो उसी
पासबुक पर उनका नाम उनके सामने यह कह कर काट दिया गया जाओं जो करना हो कर
लेना तथा दुसरे का वही खाता संख्या और पासबुक जारी कर दिया गया। इस तरह
कई प्रमाण है जिससे प्रबंधक के द्वारा अनियमितता किए जाने की बात सामने
आती है। नियम कानून की अनदेखी करते हुए प्रबंधक ने बाप को किसान केडेडी
कार्ड जारी किया तो बेटा को बटाईदार बना दिया।इस कड़ी में रविन्द्र सिंह,
मुकेश कुमार, युगल सिंह, भूसण सिंह, तथा मु खीया पति झंटू सिंह का नाम
प्रमुख है। इतना ही नहंी प्रबंधक के द्वारा इन्दिरा आवास में दलितों बिना
नज़राना के उसका पास बुक नहीं खेलते तथा इसकी शिकायत तब पंचायत
प्रतिनिधियों से की गई तो पंचायत समिति की 15/11/2009 को हुइ्र बैठक में
प्रस्ताव पारित किया गया कि इस प्रबंधक को हटाया जाय। इससे पूर्व जिला
उपविकास आयुकत के द्वारा 12/8/09 को पत्रांक 2074 के माध्यम से प्रखण्ड
विकास पदाधिकारी को पत्र लिखा गया जिसमें ंशाखा प्रबंधक पर इन्दिरा आवास
मे कमीशन लेने के आरोप मे स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात
कही गई पर अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई है। बैंक प्रबंधक की अनियमितता
की शिकायत ग्रामीणों के द्वारा जब 19/5/09 को उच्चधिकारियों से की गई तो
इसकी जांच की गई तथा जांच में भी सारी बातें सामने आई और फिर भी कोई
कार्यवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने पैक्स अध्यक्ष अविनास सिंह के
नेतृत्व में फिर इसकी शिकायत 4/1/10 को की जिसकी जानकारी मिलने पर
प्रबंधक द्वारा पैक्स अध्यक्ष पर बैंक में आकर धमकाने एवं रंगदारी मांगने
का मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

रंडीबाज

रंडीबाज (लघुकथा, एक कल्पकनिक कथा। इस कहानी से किसी व्यक्ति या संस्था को कोई संबंध नहीं है) चैत के महीने में अमूमन बहुत अधिक गर्मी नहीं होत...