13 फ़रवरी 2010

तहलका ने झकझोर दिया..

तहलका ने झकझोर दिया..
कुछ बात है जो कभी कभी उद्वेलित कर देती हैं, खास यदि कोई मिडिया को लेकर
बात करे तो बात ही क्या है। निराशा के नीरब अंधेरी रात में आज भी कोई है
जो चराग जला रहा है शायद तहलका उसमें एक है। खास कर मिडिया को लेकर आनन्द
प्रधान का आलेख झकझोर गया। खास कर आनन्द प्रधान कि यह बात कि टैबलॉयड
अखबारों और चैनलों के पाठक-दशZक क्वालिटी अखबारों-चैनलों से कई गुन रहे
हैं लेकिन जनमत बनाने का और प्रभाव के मामले में टैबलॉयड, क्वालिटी
अखबारों-चैनलों के आगे कहीं नहीं ठहरते........
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