27 फ़रवरी 2010

क्या आपको पता है कि आतंकबाद क्या है.........

बड़ी खुशी हुई यह जानकर की पाकिस्तानी विदेश सचिव ने स्वीकार कर लिया कि आतंकवाद के जनक वहीं हैं। चौंकिए नहीं। सच में स्वीकार कर लिया। पाकिस्तानी विदेश सचिव ने साफ कहा कि भारत मुझे आतंकबाद पर लेक्चर न दे मुझे पता है कि आतंकबाद क्या है। विदेश सचिव सलमान बशीर ने भारत के विदेश सचिव निरूपम राव से साफ साफ इसकी स्वीकारोक्ती कर ली। हां अब यह बात भले ही दिगर है कि उनकी स्वीकारोक्ती को भी हम नहीं समझ रहें है और बार बार उन्हें अपने यहां बुला कर समझाने का प्रयास करते है कि भाई जो तुम करवा रहे हो वह आतंकवाद है। 
विदेश सचिव महोदय ने कहा कि लेक्चर न दें हमें पता है। पता कैसे नहीं होगा। आतंकवाद को पालना, प्रशिक्षित करना और फिर आतंक पैदा करने के लिए उसका इस्तेमाल करने वालों को जितना पता होगा भला उतना भारत कैसे जानेगा। सो बशीर साहब ने साफ कहा कि बात करनी हो तो कश्मीर पर करो आतंकबाद में क्या रखा है। आतंकबाद को पालने पोसने में अरबों खर्च करने वालों को समझाना बेबकुफी ही है। मुझे सूचना मिली है कि यह बात जैसे ही अमेरिका के मुखीया ओबामा को कही गई कि पाकिस्तान कह रहा है कि उसे पता है कि आतंकबाद क्या है तो वे चौंके नहीं और बोले यह तो हमें भी पता है तभी तो अरबों डालर का खर्चा हम पाकिस्तान को दे रहें है। हम यह भी चाहते है कि भारत को पाकिस्तान से सिखना चाहिए कि आतंकबाद क्या है और इसलिए बारबार जोर देकर बार्ता की बात कहतें  है।
सबको पता है कि पाकिस्तान को पता है कि आतंकवाद क्या है बस यह बात अपने मनमोहन सिंह को पता नहीं है, सोनीया गांधी को भी पता नहीं है या फिर इनको भी पता है! तभी तो कसाब के उपर प्रति दिन 15 लाख खर्च कर ये मेहमान बनाए हुए है और  संसद पर हमला करने वाले को फांसी की सजा होने पर भी ये उनको मेहमान बनाए हुए है, तभी तो आजमगढ़ जाकर हमारे दिग्गी राजा कहते है कि गिरफ्तार युवक आतंकबादी नहीं, तो क्या बाटला हाउस में मरने वाले इंस्पेक्टर ने तो खुदकुशी की थी, ``देश के लिए मरना आज खुदकुशी ही है´´ लगता है कि सबको पता है कि आतंकबाद क्या है बस नहीं जानते तो आतंकबादी धटनाओं में मरने वाले..............







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रंडीबाज (लघुकथा, एक कल्पकनिक कथा। इस कहानी से किसी व्यक्ति या संस्था को कोई संबंध नहीं है) चैत के महीने में अमूमन बहुत अधिक गर्मी नहीं होत...