14 फ़रवरी 2010

वेलेन्टाइन डे -प्रेमियों का एक संगठन होना ही चाहिए

वेलेन्टाइन डे -प्रेमियों का एक संगठन होना ही चाहिए
बहुत दुख होता है तब, जब कहीं कोई आज भी प्रेमियों के साथ आदिम युग सा
बर्बरता करता है। तब और भी दुख होता है जब कोई इसके लिए आवाज तक उठाने
वाला नहीं होता है। प्रेम एक नैसगिZक सम्बंध है और इसके बारे मे बहुत बार
बहुत कुछ लिखा जा चुका है, मैं इस उपदेश में नहीं जाना चाहता। मैं तो यह
चाहता हूं प्रेमियों के लिए एक संगठन होना ही चाहिए। प्रेमियों के साथ आज
भी पुलिसिया दुव्र्यवहार चरम पर होता है, कानून ताक पर रखे जाते है।
पैसों का खेल होता है। समाज पुलिस से एक कदम आगे रहता है। बहुत कुछ कहा
जा सकता है अभी नहीं, अभी तो बस वेलेन्टाइन डे पर प्रेमियों और प्रेम से
सहानुभूति रखने वालों से एक अपील कि प्रेमियों का एक संगठन बनना चाहिए।
नहीं मेरा उददेश्य चिरकुट प्रेमियों को संरक्षित करना नहीं। मेरा मन्तव्य
यह, कि नैसगिZक प्रेम पर आज कथित आधुनिक समाज में आदिम बर्बरता नहीं होनी
चाहिए। प्रेमियों के लिए कानून में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। प्रेमी
जोड़ों को बलात्कारी और अपहर्ता बनाया जाता है यही है कानून। कहीं समाज
के पण्डित नैतिकता के नाम पर जुल्म करते है और स्वयं सजा सुनाते है।
भाई भिखाड़ियों के लिए अवाज उठाने वाला संगठन है प्रमियों का क्यों
नहीं। वेलेन्टाइन पर आज इसकी पहल होनी चाहिए तरीका और सिद्वान्त चाहे जो
हो पर संगठन बने और वही तय करे...............

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...