28 नवंबर 2010

ये है मेरा बिहार- जागरूक और जवान


ये है मेरा बिहार जिसे राजनीतिक तौर से जागरूक समझा जाता है और इसकी वानगी यहां देखिए।

शेखपुरा जिला मुख्यालय के चांदनी चौक पर स्थित एक चाय दुकानदार की चर्चा अहम है। पच्चीस नवम्बर को इस चाय दुकान पर चाय पीने अपने मित्र के साथ गया था और चाय का आर्डर देकर बैठा ही था की तभी एक बुजुर्ग के द्वारा  पढ़े जा रहे अखबार पर नजर पड़ी और वरबस ही समय बिताने के लिहाज से अखबार पढ़ने की  इच्छा जगी और तभी ध्यान इस बात पर गया कि बुजुर्गवार संपादकीय पन्ना उल्टे हुए है। फिर हमलोग चाय पीने लगे और करीब 20 से 25 मिनट तक चाय दुकान पर गप्पबाजी भी होती रही और जब जाने का उपक्रम हुआ तो मैं अखबार देने के लिए बुजुर्ग की तरफ बढ़ा और चौंक गया। बुजुर्गवार अभी पूरी तल्लीनता से संपादकीय पन्ना पर छपे आलेख पढ़ रहे थे। मैं चौंक पड़ा! आधे धंटे से बुजुर्ग आदमी संपादकीय पढ़ रहे है। मैं वरबस  ही उनकी ओर मुखातिब होकर पूछा कि ‘‘बाबा क्या कर पढ़ रहें है’’। तब उनकी तन्द्रा टूटी और कहा ‘‘बउआ स्पेक्ट्रम घोटाला के बारे में पढ़ रहें है, कांग्रेस वाले लोग भाजपा पर आरोप लगा रहें है कि संसद नहीं चलने दे रहें है और आज राष्ट्रीय सहारा में भी इसी पर आलेख छपा है। भला बताईए इसमें भाजपा का क्या दोष, दोषी तो कांग्रेस है। क्यों नहीं जेपीसी का गठन कर संसद को चलने देती है, जब वह चोर नही है ंतो डरती क्यों है।’’
इस युवा बुजुर्ग ने अपना नाम जगदीष प्रसाद तथा उर्म पच्चासी साल बताया। और कुरेदने पर उन्होंने बताया कि सालों से वे संपादकीय पन्ना पढ़ रहें है और मांग मांग कर भी वे सभी अखबारों के संपादकीय पन्ना जरूर पढ़ते है। संपादकीय क्यों पढ़ते है पूछने पर उन्हांेने बताया कि और पन्नों में तो बउया फालतू समाचार रहता है और जब से अखबार क्षेत्रीय हुआ है पूरे देष की बात तो छोड दिजिए बिहार की खबर नहीं मिलती और संपादकीय पन्ना पर ही देष की हालात की जानकारी मिलती है।

यह बात बहुत छोटी है, पर यही है मेरा बिहार। यहां मामुली सा चाय दुकान चलाने वाले पच्चासी साल का बुजुर्ग आदमी देश की राजनीति को समझना और जानना चाहते हैं उसपर खुल कर चर्चा करता है। 



इसी कड़ी में एक बात और जोड़ना चाहता हूं। हमलोगों के गर्जीयन है वरिष्ठ पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी बासुदेव वरणवाल। उर्म 92 साल। जगरूकता इतनी कि प्रतिदिन जिले के सभी पत्रकारों को मोबाइल कर पूछ लेते है कि कुछ नया तो नहीं है। नीतीश की सभा में भाषण देने चले गए जबकि उस दिन गर्मी बहुत थी और आने के क्रम में बेहोश भी हो गए। सभी अखबारों पर खासी नजर रखते है और राष्ट्रीय खबरों पर हमलोगों के साथ बैठ कर बहस करते है। कह सकता हूं कि मैं नैजवान होकर भी उनके इतना जागरूक नहीं हूं।

यही है मेरा बिहार..............................


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