17 नवंबर 2010

नेता जी..

नेता जी

परम् आदर-णीय नेता जी करते हैं राज-नीति,

किस तरह किया जाय राज, बनाई है एक नीति।


क्षेत्र के दबंगों को इनका हैं संरक्षण,
विकास मद का साथ साथ कर रहे हैं भक्षण।

ब्युरोके्रटों से इनका गहरा सम्बंध है,
कुछ तुम खाओ,
कुछ  हम खायें, यही अनुबंध है।

इसी तरह से चलता इनका तन्त्र है
ठेकेदार, डीलर और चम्मचे खास इनका यन्त्र है।

कविवर को नमन

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है हो जाये अच्छी भी फसल...