13 दिसंबर 2010

कि फिर आऐगी सुबह

हर सुबह एक नई उम्मीद लाती है

खब्बो से निकाल

हमको जगाती है


अब शाम ढले तो उदास मत होना

उम्मीदों कों सिरहाने रखकर तुम चैन से सोना

कि फिर आऐगी सुबह

हमको जगाऐगी सुबह

रास्ते बताऐगी सुबह

उम्मीदों कें सफर को मंजिल तक पहूंचाऐगी सुबह................. 

सोशल मीडिया छोड़ो सुख से जियो, एक अनुभव

सोशल मीडिया छोड़ो, सुख से जियो, एक अनुभव अरुण साथी पिछले कुछ महीनों से फेसबुक एडिक्शन (सोशल मीडिया एडिक्शन) से उबरने के लिए संघर्ष करना पड़ा...