18 दिसंबर 2010
प्रेम की परिभाषा
प्रेम
समर्पण का एक अन्तहीन सिलसिला
आशाओं
आकांक्षाओं
और भविष्य के सपनों को तिरोहित कर
पाना एक एहसास
और तलाशना उसी में अपनी जिन्दगी.....
.
2 टिप्पणियां:
संजय भास्कर
18 दिसंबर 2010 को 12:28 pm बजे
हमेशा की तरह ये पोस्ट भी बेह्तरीन है
कुछ लाइने दिल के बडे करीब से गुज़र गई....
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कडुवासच
18 दिसंबर 2010 को 2:49 pm बजे
... bahut sundar !!!
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काव्य की स्वर लहरी
हमेशा की तरह ये पोस्ट भी बेह्तरीन है
जवाब देंहटाएंकुछ लाइने दिल के बडे करीब से गुज़र गई....
... bahut sundar !!!
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