26 जनवरी 2011

अपने ही देश में तिरंगा पराया हो जाएगा। -----कविता





किसने सोंचा था

‘‘केसरिया’’

आतंक के नाम से जाना जाएगा।

‘‘सादा’’ 

की सच्चाई गांधी जी के साथ जाएगा।

‘‘हरियाली’’ 

के देश में किसान भूख से मर जाएगा।

और 

कफन लूट लूट कर स्वीस बैंक भर जाएगा।


किसने सोंचा था

लोकतंत्र में

गांधीजी की राह चलने वाला मारा जाएगा।

आज भी भगत सिंह फ़ांसी के फंदे पर चढ़ जाएगा।

किसने सोंचा था

भाई भाई का रक्त बहायेगा।

देश के सियाशतदां आतंकियों के साथ जाएगा।

अपने ही देश में तिरंगा पराया हो जाएगा।

और हमारा देश

शान से

आजादी का जश्न मनाएगा।


जय हिंद।




(चित्र- एम. एफ़. हुसैन)


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