29 जनवरी 2011

बिहार में प्रशासनिक तानाशाही, जनता दरबार मे फरीयाद लेकर गए युवक को जिलाधिकारी ने भेजा जेल।


बिहार में सत्तारूढ सरकार और उनके कारींदों की तानाशाही सामने आने लगी है। इस तानाशाही का नतीजा है की जनता दरबार मे फरीयाद लेकर गए युवक को जिलाधिकारी के आदेश पर जेल भेज दिया गया। मामला शेखपुरा जिले के नगर परिषद क्षेत्र के बार्ड संख्या 22 का है। बार्ड संख्या 22 में राशन किरासन नहीं मिलने से परेशान बड़ी संख्या में लोगों ने सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्त्ता विनोद दास से इसकी गुहार लगाई । मामला संगीन था। मामला यह था कि वहां लाल कार्ड बाहर से लाल और अंदर से हरा था जिसकी वजह से गरीबों को अनाज और किरासन नहीं मिल पाती थी जिसको लेकर बिनोद दास ने अपने भाई वार्ड सदस्य के विरूद्व जिलाधिकारी के जनता दरबार मे दो तीन बार गुहार लगाई पर महीनो बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कार्यबाई नहीं हुई तो बिनोद दास ने बार्ड के लोगों के साथ जिलाधिकारी धर्मेन्द्र सिंह के जनता दरबार में पहूंच गए। जब विनोद दास को फिर आश्वासन मिला तो बिनोद दास ने समाहरणालय से मुख्य द्वार महिलाओं के साथ नारेबाजी करने लगे तब जिलाधिकारी ने बिनोद दास को फिर से बार्ता के लिए बुलाया और उसके बाद पुलिस के हवाले कर दिया। बिनोद दास पर बिना आदेश लिए समाहरणालय परिसर मे हंगामा करने का आरोप लगाया गया है। इस आरोप में बिनोद दास जेल मे बंद है। इस घटना के बाद जिलाधिकारी ने सभी मीडिया कर्मियों को समाचार को प्रकाशित नहीं करने की धमकी दी नही ंतो उनके उपर भी एफआईआर दर्ज करने की बात कही। घटना की खबर तो अखबारों मे प्रकाशित हुई पर प्रमुखता से नहीं। चैनलों  में भी कुछ लोगों ने खबर को भेजा पर खबर के प्रति ध्यान नहीं दिया गया।

कविवर को नमन

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है हो जाये अच्छी भी फसल...