01 जनवरी 2011

नववर्ष की हार्दीक शुभकामनाऐं....


संत कबीर की इन चंद पक्तियों के साथ नववर्ष की मंगलकामनाऐं


कली खोटा जग आंधरा, शब्द न माने कोय।
चाहे कहूं सत आइना, जो जग बैरी होय।।

नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग।
और रसायन छांडि के, नाम रसायन लाग।।

काजल केरी कोठड़ी, तैसा यहु संसार।
बलिहारी ता दास की पैसिर निकसण हार।।

जागो लोगों मत सुवो, ना करूं नींद से प्यार।
जैसा सपना रैन का, ऐसा यह संसार।।

भेष देख मत भूलिये, बूझि लीजिये ज्ञान।
बिना कसौटी होत नहीं, कंचन की पहिचान।।

एचएम और शिक्षक सरकारी स्कूल में पी रहे थे ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर

सरकारी स्कूल में नशीला पदार्थ आया ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर शेखपुरा बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल है। सरकारी स्कूल में प्रधानाध्...