15 मार्च 2010

मध्याह्न भोजन में मैला मिलने से बबाल, बच्चों ने किया स्कूल का वहिष्कार खबर के बाद भी नहीं आये पदाधिकारी



शेखपुरा-बिहार
मध्याह्न भोजन योजना किस तरह बच्चों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है इसका एक और नजारा देखने को मिला बरबीघा प्रखण्ड के मकनपुर डीह प्राथमिक विधालय में। विधालय में बच्चों के लिए बनाए जा रहे भोजन में मैला मिलने के बाद हंगामा खड़ा हो गया और बच्चों ने विधालय का ही बहिष्कार कर दिया और अब बच्चों के अभिभावक बच्चों को स्कूल जाने देना नहीं चाह रहे। इस सम्बंध में रसोईया मन्ती देवी ने बताया कि मध्याह्न भोजन के दाल में मैला मिलने की बात जब प्रभारी प्रधानाध्यापीका आशा रानी को बताया गया तो उनके द्वारा इसपर कोई पहल नहीं ली गई और बच्चों को वही खाना खाने के लिए दिये जाने की बात रसोईया से कही गई। खाने में मैला होने की बात जब बच्चों के कानों तक गई तो उनके द्वारा खाना खाने से  इंकार कर दिया गया और सभी बच्चे विद्यालय से भाग खड़े हुए और अब ये बच्चे विद्यालय नहीं आना चाहते। खाना में मैला होने की बात स्वीकार करते हुए रसोईया ने बताया कि उसके बाद जब खाना किसी बच्चों ने नहीं खाया तो खाने को फेंक दिया गया और  जैसे ही  इसकी भनक ग्रामीणों को लगी तो उनके द्वारा हंगामा किया जाना लगा। इसको लेकर अपना रोष जताते हुए दयानन्द चौधरी कहते है कि विद्यालय में खाना खिलाने को लेकर व्यापक गड़बड़ी है और कभी बच्चों को सही भोजन नहीं दिया जाता है और जब मैला युक्त भोजन बच्चों को खिलाने की बात प्रधानाध्यापिका कह सकती है तो फिर जहर मिला खाना खिलाने में उन्हें क्या परहेज होगा। पूर्व शिक्षा समिति अध्यक्ष दयानन्द चौधरी ने कहा कि इस विद्यालय में ज्यादतार बच्चे महादलित समुदाय के है इसलिए जानबुझ कर उनके साथ भेद भाव किया जाता है। इस अवसर पर छात्र गणेश कुमार, अमरेद्र कुमार ने बताया कि जब उन्हें खाने में मैला होने की भनक लगी तो वे विद्यालय से भाग गए। खाने में मैला होने की खबर भी तत्काल ग्रामीणों के द्वारा पदाधिकारियो को दी गई पर किसी ने इसकी सुध नहीं ली। 
विद्यालय में प्रशासनीक लापरवाही का नजारा भी कई मामलों में देखने को मिला। विद्यालय में  किचन शेड के लिए राशि की उपल्बध्यता के बाद भी किचन शेड आधा अधुरा बना हुआ है और इतना ही नहीं ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य भुसण पासवान ने बताया कि विधायल को उत्क्रमित कर मध्य विद्यालय बनाने का प्रस्ताव पंचायत समिति की बैठक मे पारित कराया गया और इसके आलोक में राशि का  आवंटन भी कर दिया गया पर प्रधानाध्यापिका की लापरवाही की वजह से भवन नहीं बन रहा है।

उधर इस सम्बंध में प्रधानाध्याापिका आशा रानी ने बताया कि भोजन में मैला होने की बात का जब उन्हें चला तो उनके द्वारा खाना फेंकबा दिया गया पर ग्रामीण राजनीति की वजह से बच्चों को विद्यालय आने नहीं दिया जा रहा है।

मामला चाहे जो हो पर मध्याह्न भोजन योजना विद्यालय को भोजनालय बना कर रख दिया और इसकी गाढ़ी कमाई पर कब्जे को लेकर लगातार विद्यालयों में धमासान होता रहता है जिसकी वजह से बच्चों का  भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

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