17 मार्च 2010

आज भी गांधी ज़िन्दा है...............



अभावों के बावजूद खेतों में अन्न उपजाते किसान के इस रूप को गांधी नहीं कहेगें क्या.....

कटिहार के एक गांव में गर्मा धान की खेत में खर-पतवार की निकाई करने के क्रम ली गई तस्वीर देश के रहनुमाओं से शायद  कह रही  कुछ...

एक तर्जे-तगाफुल है सो वो उनको मुबारक।
एक अर्जे-तमन्ना है सो हम करते रहेंगें।।
फैज अहमद फैज.

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर अरुण साथी ताजिया को अपने कंधे पर उठाए मेरे ग्रामीण युवक बबलू मांझी रात भर जागकर नगर में घूमता रहा। ...