03 जनवरी 2010

आंखे

मुझे ऐसा क्यूं लगता है
कुछ कहती है तुम्हारी आंखे।

क्यों प्रफुिल्लत होता है अंतर मन
जब मिलती है हमारी आंखे

क्यों अंत: की वेदना
सिमट जाती है
जब सामने होती है तुम्हारी चंचल आंखे

पता नहीं कोई बोत है
शायद प्रेम
जो कर बैठी है हमारी आंखे।।

देशद्रोही साबित करो गैंग माननीयों के पीछे

           चार माननीयों ने जब लोकतंत्र के लिए खतरे की बात कही तो स्वघोषित कट्टरपंथी और देशद्रोही साबित करो गैंग सक्रिय हो गई है। सोशल मीडि...