24 जनवरी 2010

मैं रावण हूं।

मैं रावण हूं।
मेरे पास है अहं की पराकाष्ठा,
अविवेक है मेरा सहचर,
मैं नहीं देख सकता अपने से श्रेष्ठ।

मैंने ठानी है लड़ाई फिर राम के साथ,
रक्तपिपासा मेरे मन को चाहिए ``आदमखून´´।

स्वर्णमहल में रहकर भी
नहीं होती है मेरी तुष्टी।

मैं अपने आराध्य के दिये ताकत से करता हूं शासन,
जिसके लिए मैंने की है वषोZ तपस्या।

और अब ,
मै अमर हो गया हूं,
क्योंकि आज कोई राम नहीं।

मुझे डर लगता है बन्दरों से
जिसकी तन्द्रा अगर टुटी
तब मैं कहां जाउंगा.....

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...