19 जनवरी 2010

शिखर

शिखर..........................काव्य धारा
शिखर पर पहुंचना बहुत मुिश्कल है।
साहस
धैर्य
निरन्तर प्रयास
और जुनून हो
तो हर कोई पहुंच सकता है..

मुिश्कल है शिखर पर टिक पाना!
अहं
घृणा
विवेक शून्यता की पराकष्ठा से
गिर पड़ता है
शिखर पर पहुंचा हुआ
``आदमी´´

और  टूट का बिखर जाता है। टू   

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...