26 फ़रवरी 2014

माँ बनना ,,,


माँ  बनना 
जिंदगी देकर 
जिंदगी देना है...

देह सुख से
देह के सृजन तक
पल पल
माँ बनने का सुख
लील लेती है
प्रसव की असाह्य वेदना..

और कभी कभी 
गर्भ नाल से रिस रिस कर
पला हुआ जीवन
लील लेता है 
एक माँ को भी....

प्रसव के दौरान एक मां की दुखद मृत्यु  के बाद उपजी पीड़ा को शब्दों में बांधा है। चिकित्सक की लापरवाही अस्पताल में एक साल पुर्व ही विवाह बंधन में बंधी पिंकी की मौत हो गई। उसकी उम्र अभी मात्र 22 साल हुई थी। कुछ धंटे की ही उसकी बेटी के सर से मां का साया उठ गया। वहीं शव से लिपट कर पिंकी की मां रो रही है तब भला भावनाओं को मैं भी नहीं रोक सका और शब्दों को बांध दिया है...




4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (26-07-2014) को भोले-बाबा अब तो आओ { चर्चा - 1536 } में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना बधाई आपको ।

    जवाब देंहटाएं

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