06 जनवरी 2026

अरे, लल्लन टॉप, सौरभ द्विवेदी का नहीं था..!

जब कभी कोई कहता है कि समाज में अच्छे लोगों की कद्र नहीं । समाज उनको भूल जाता है। समाज बड़ा निष्ठुर है। तब समाज स्वयं आगे आकर इस बात को गलत सिद्ध करता है।  अभी लल्लन टॉप सौरभ द्विवेदी को लेकर भी यही हो रहा। जिसको देखिए, वही पूछ रहा। वही बता रहा। ऐसे थे। वैसे थे। गजब। एक दम लल्लन टॉप है। 
कोई आदमी कितना बड़ा है, यह इसी से तय होता है। आज लल्लन टॉप वाले सौरभ द्विवेदी  शिखर पर है। इसका प्रमुख कारण, एकपक्षीय पत्रकारिता के युग में इन्होंने संतुलन बनाए रखा। तराजू का पलड़ा किसी ओर कभी झुकता नहीं दिखा। 

और बस इसीलिए तो भरोसा नहीं हो रहा। सब तो इसलिए भी चौंक रहे की अरे 

ई लल्लन टॉप, सौरभ द्विवेदी का नहीं था...?

खैर, बस दो शब्द और

***

वह कौन शख्स है
जो एकदम फक्कड़ 
जैसा हंसता है...

और फिर झट से
चुप हो जाता है ऐसे 
जैसे रोते बच्चे को
मां मिल गई हो..

और देखिए तो
कैसे चौआनियाँ 
मुस्कान के साथ 
आहिस्ते से पूछ लेता है
किसी से भी 
कड़वा प्रश्न....

*****
वह कौन शख्स है
जो छोड़ गया सबको

किस लिए, यह किसी को
नहीं बताया उसने
पर सब जानना चाहते है
कारण...

कारण ही तो महत्वपूर्ण
होता उनके लिए
जो चिंता करते है उनकी
जो सबकी चिंता किया करता है...

और इसी लिए तो सब चिंतित
सौरभ के लिए...

(अरुण साथी)

3 टिप्‍पणियां:


  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 7 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. लोग आते हैं लोग जाते है ... दुनिया चलती रहती है।
    सादर।
    बहुत अच्छी अभिव्यक्ति।
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