क्या वंचितों को अधिकार दिलाने का श्रेय केवल बाबा साहेब को ही है...?
(दलित चेतना और सवर्ण)
अरुण साथी
पुण्य तिथि पर बिहार केसरी डॉ श्री कृष्ण सिंह को जन्म भूमि (माउर) जाकर नमन किया। अभी चुनाव नहीं है, इसलिए कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ। फिर जगह जगह प्रतिमाओं पर लोगों ने माल्यार्पण किया। पुष्पांजलि की। आज के दौर ने बिहार केसरी ज्यादा प्रासंगिक हो गए। अभी महापुरुषों को जातियों में बांट दिया गया है। श्री बाबू के साथ भी यही हुआ। भूमिहार ब्राह्मणों के कुछ नेताओं ने अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए यह किया। उनका स्वार्थ सध गया। समाज का नुकसान हो गया। हालांकि बड़ा वर्ग नेताओं के साथ नहीं गया।
खैर, अभी सोशल मीडिया पर दलित विमर्श और दलित चेतना के नाम पर अर्ध सत्य को प्रसारित कर समाज को बांटने की बड़ा षडयंत्र हो रहा। और समाज बंट भी गया है। दलित वर्ग में सवर्णों के प्रति ऐसा विष बोया गया है दलितों का बौद्धिक वर्ग भी प्रतिशोध ले रहा..!
1990 का मंडल आग एक बार फिर यूजीसी के बहाने, सुलगाने का प्रयास हुआ। और यह सुलग रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर विराम लगाने की पहल की है पर नेताओं के द्वारा इस आग को हवा दी जा रही।
नेताओं को पता है कि जब तक समाज जलेगा नहीं तब तक उनको कौन पूछेगा...? दुर्भाग्य से इस बार कमंडल वालों ने यह खेल कर दिया है।
हालांकि एक सकारात्मक बात यह हुई इस बार कुछ दलित और ओबीसी ने इसका खुल कर प्रतिरोध किया। बकाई सोशल मीडिया पर विष वमन कर रहे...!
अब यूजीसी का बवाल थोड़ा शांत हुआ है। पर इसमें कई प्रश्न उठे है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या समाज से भेदभाव, छुआछूत मिटाने की लड़ाई केवल दलितों के नेताओं , समाज सुधारकों ने लड़ी ...? क्या वंचितों को अधिकार दिलाने का श्रेय केवल बाबा साहेब को ही है...?
तो ऐसा नहीं है। संत रैदास, संत कबीर, संत तुकाराम इत्यादि के साथ साथ आदि शंकराचार्य , दयानंद सरस्वती , स्वामी विवेकानंद, ज्योतिबा फुले इत्यादि लंबी सूची है। कईं बड़े नेताओं ने संघर्ष किया।
श्री बाबू ने दलितों को देवघर मंदिर में प्रवेश करा कर भेदभाव के विरुद्ध बड़ी लकीर खींची थी। वहीं जमींदारी उन्मूलन कर समाज में बराबरी की पहल की। दोनों मामले में उनके स्वजातीय उनसे नाराज हुए थे। श्री बाबू को तिरस्कार झेलना पड़ा था...
समाज में बराबरी की पहल समाज में नीचे के स्तर पर भी हुआ है । और गैर बराबरी का विष दलितों का दलितों से भी है। दलितों का पिछड़े से भी है। और तो और ब्राह्मणों का ब्राह्मणों से भी है....लगातार प्रमाणिक रूप से इस पर लिखना शुरू कर रहा हूं...यह कॉलम जारी रहेगा....
(दलित चेतना और सवर्ण)