03 जुलाई 2023

गुरु पूर्णिमा पर विशेष: ओशो कहते है गुरु तुम्हारे ज्ञान को छीन लेता है

गुरु पूर्णिमा का परमगुरु ओशो के विचार


शिष्य हो जाना एक महान क्रांति है, लेकिन भक्त होने की तुलना में कुछ भी नहीं। किस क्षण शिष्य परिवर्तित होकर भक्त बनता है? गुरु की ऊर्जा, उसका प्रकाश, उसका प्रेम, उसका मुस्कराना, उसकी उपस्थिति मात्र से शिष्य इतना पोषित हो जाता है- और बदले में वह कुछ दे नहीं सकता। ऐसा कुछ है ही नहीं जो वह दे सके। एक क्षण आता है जब वह गुरु के प्रति इतना अनुग्रहित होता है कि वह अपना सिर गुरु के चरणों में झुका देता है। स्वयं को देने के अतिरिक्त उसके पास कुछ भी नहीं होता। उसी समय से वह गुरु का ही अंग बन जाता है। गुरु के हृदय के साथ उसका हृदय धड़कने लगता है। वह गुरु के साथ एकलय हो जाता है। यही है गुरु के प्रति एकमात्र अनुग्रह, कृतज्ञता, कृतार्थता।


गुरु ज्ञान देता नहीं, तुम्हारे ज्ञान को छीन लेता है। गुरु तुम्हें भरता नहीं, खाली करता है। गुरु तुम्हें शून्य बनाता है। क्योंकि शून्य में ही पूर्ण का आगमन हो सकता है। गुरु तुम्हें खाली करता है, ताकि परमात्मा के लिए जगह हो सके। वह पहले तुम्हें परम अज्ञानी बना देता है, क्योंकि जैसे ही तुम परम अज्ञान की प्रतीति से भर जाते हो, वैसे ही परमात्मा के द्वार खुल जाते हैं। गुरु शब्द का उपयोग करेगा, लेकिन भली-भांति जानते हुए कि शब्द केवल भूमिका है। सत्य उससे दिया नहीं जा सकता। गुरु तुम्हारे एक कांटे को दूसरे कांटे से निकालता है। फिर कहता है दोनों कांटे फेंक दो।

3 टिप्‍पणियां:

  1. गुरु सही कहे हैं | ओशो ने कही गुरु घंटालों के लिए भी कुछ कहा है ?

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    1. गुरु घंटाल के लिए तो बहुत कहे sir फिर कभी

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  2. Osho is the best philosopher of his time but his words are true in every aspect of LIFE! Thanks Arun ji.. Hope Sheikhpura will get more people like you to enlighten society through his work.

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