रॉलेट एक्ट जैसा UGC का काला कानून वापस लो
संविधान ने जातिगत भेदभाव नहीं होने का अधिकार दिया है। पर हमारे देश के राजनीतिज्ञ जातिगत भेद भाव को वोट की राजनीति के तहत उपयोग कर समाज को बांटा रहे । इसमें कई नाम है। 1919 में अंग्रेजों ने काला कानून रॉलेट एक्ट लाया था। फिर मंडल आंदोलन में बीपी सिंह के बाद लालू यादव ने भूराबाल साफ करो का नारा दिया। मायावती ने तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार का विष बेल बोया। इसी पर काम किया।
बीजेपी और मोदी सरकार ने पहले sc, st ACT पर सुप्रीमकोर्ट का झूठे मुकदमे को देख दिया फैसला बदल कर वही किया। आज यह मुकदमा 95 प्रतिशत झूठा होता है।
अब नरेंद्र मोदी की सरकार ने UGC के द्वारा पुनः जातिगत भेद भाव की लंबी लकीर खींच दी।
अब विश्विद्यालय में पढ़ने वाले sc st और obc विद्यार्थी को पीड़ित मान लिया। और सवर्ण समाज को पीड़क, अत्याचारी, खलनायक मान लिया। यही नियम लागू किया गया। अब एक समिति बनेगी जो केवल आरोप लगाने भर से केवल सवर्ण विद्यार्थी को दोषी माना जाएगा। समिति इसपर कार्रवाई करेगी।
कॉलेज से निष्कासन, निबंधन रद्द, पुलिस में हवाले और जेल। मतलब, जिस किसी सवर्ण विद्यार्थी पर sc, st, OBC के द्वारा जातिगत भेद भाव का आरोप लगा, उसका जीवन सर्वनाश हो जाएगा।
इतना ही नहीं, यही स्थिति कॉलेज में पढ़ाने वाले प्रोफेसर पर भी लागू है । अब, गुरुजी भी इनसे डरे डरे रहेगें।
और यह काला कानून समानता का कानून के नाम पर लाया गया। पर इसमें पहले जांच का प्रावधान नहीं। इसमें झूठा आरोप लगाने पर कोई सजा नहीं...!
यह रोहित बोमिला के केस के बहाने हुआ। वही रोहित बोमिला जो कानूनी रूप से sc साबित नहीं हुआ। उसकी आत्महत्या के कारण में जातीय भेदभाव स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। यह सब नरेटिव बनाया गया।
अब यूजीसी ने एक भयानक काला कानून थोप दिया है। अब बीजेपी और नरेंद्र मोदी की सरकार ने वोट बैंक के लिए बांटने का और बड़ा काम किया।
यह क्यों हुआ..? यही होता है। नेता यही करते है। स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक यही होता है। जो उनके साथ है नेता उसका महत्व नहीं देते। जो जितना प्रखर विरोध में होता है, उसे अपने साथ लाने का सारा जतन नेता करता है।
यूजीसी के माध्यम से वही किया गया। जो कुछ sc और OBC बीजेपी का प्रखर विरोध करते थे, उसी को साधने के लिए यह किया।
अब जो बीजेपी के प्रबल समर्थक थे। जिनको भक्त कहके गाली दी जाती है, बीजेपी ने उन्हीं पर प्रहार किया।
अब यह भी समझिए। Sc, st, OBC के विरुद्ध कोई अत्याचार हो। कोई कानून बने , तो कोई न कोई सवर्ण उसका विरोध करेगा। उनके साथ खड़ा होगा। अत्याचार का विरोध करते हुए अपने समाज से लड़ेगा। पर जब सवर्ण पर अत्याचार हो तो सारा का सारा गैर सवर्ण या तो प्रसन्न होगा या मौन साध लेगा।
अब देखिए। समाज के रहकर, कई बार sc के साथ अत्याचार का प्रखर विरोध किया। और पत्रकारीय यात्रा में कई ऐसे लोग को जानता हूं जो sc st ACT के तहत फर्जी मुकदमा करने के लिए प्रसिद्ध है। जरा सा पैसे के लालच में वह किसी पर मुकदमा करता है। क्या ऐसे लोगों की जांच नहीं होनी चाहिए। पर होता यह है कि मुकदमा करने के लिए उनको बिहार सरकार के द्वारा एक लाख तक सरकारी सहायता दी जाती है।
स्थिति भयावह है। मतलब यह कि अब सवर्णों को इस देश में रहने, जीने का मूलभूत अधिकार तक यह छीन लिया जाएगा...!
पूरे भारत में सवर्ण समाज 10 प्रतिशत होगा। मतलब अल्पसंख्यक। तब, अब एक ही उपाय बचा है। सारे सवर्ण समाज को उठा कर देश निकाला दे दो। उठा का समुद्र में फेंक दो। या जब सवर्ण समाज आज भी इतना अत्याचारी है तो इसे भी किसी टापू पर भेज दो। वहीं यह जी लेगा...
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