मुख्यमंत्री की रेस में मेरा भी नाम है..!
"हेलो, हेलो, हेलो, खेलावन काका बोल रहे हैं..! का हाल वा बउआ..! सब ठीक वा...।"
आज काका बड़ा बेचैन थे। पर उनके आवाज में एक अजीब सा उत्साह भी था।
मैने कहा, "सब ठीक है काका। बस बिहार की चिंता हो रही है।"
काका बोले, "चिंता का कौउनो बात नहीं है। राजनीति में तो यह सब होता ही रहता है। सब फार्मूला फिट कर दिया गया है।"
"पर काका, यह तो जबरदस्ती है न। चाचा तो सबकुछ इस्मूथली चला हो रहे थे...?"
मैंने पूछा, "काका ई मुख्यमंत्री कौन बनेगा...? यह सवाल तो हजार करोड़ का है..! जिसको देखिए, वही किसी को मुख्यमंत्री बना दे रहा।"
काका उवाच, "बउआ, जब तक कोय मुख्यमंत्री बन नहीं जाता, तब तक के लिए किसी को भी मुख्यमंत्री बना देने से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है। लाइक, व्यू और नोट कमाने वालों से लोग एतना जलते काहे हैं...! जलानखोर सब..."
काका ने फिर टोका, "अच्छा सुनो बउआ, क्या तुम मुख्यमंत्री बनना चाहते हो...?
"कौन नहीं चाहेगा काका, क्यों मजाक करते हैं...!"
"अरे, यह मजाक नहीं है। जल्दी से दस रुपये ऑनलाइन से भेजो...!"
काका की बात भला कौन उठाता। मैंने दस रुपये भेज दिए।
बस कुछ ही देर बाद मोबाइल में मेरे मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना का समाचार ब्रेक हो गया...!
अरुण साथी
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