08 जून 2026

काव्य की स्वर लहरी

काव्य की स्वर लहरी दैनिक जागरण की काव्य संध्या में और हास्य, व्यंग, श्रृंगार, वीर रस और जन सरोकार के कवियों ने जिस तरह काव्य की स्वर लहरी बिखेरी वह अतुल्य था।
दिनकर की कर्मभूमि शेखपुरा की धरतीके सुधी श्रोताओं ने जिस आनंद से लगभग आधी रात तक टिक कर कविता का हृदय से आनंद लिया यह अपने आप में विभोर करने वाला रहा। साहित्य अनुरागी सुधी श्रोताओं की करतल ध्वनियों के निनाद ने इस काव्य संध्या को संगीतमय, अविस्मरणीय काव्य संध्या बना दिया। दैनिक जागरण मीडिया मार्केटिंग के मित्र प्रिंस जी ने कवियों का बेहतरीन संयोजन किया। इस वजह से एक मिनट के लिए भी श्रोता अलसाये नहीं। उमंग, ऊर्जा से भरकर करताल निनाद गूंजता रहा। काव्य पाठ में सभी कवि वृंद साहित्य और काव्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर तो थे ही, सभी अपने अपने शब्दों, प्रस्तुतियां और भावों से सम्मोहित करने वाले रहे। हास्य कवि अमित शुक्ला ने बूढ़ों की शादी पर प्रतिबंध की मांग ऐसे उठाई जैसे सभी के दुखती नस को दवा दिया हो। लोग ठठाते रहे। स्वयं श्रीवास्तव ..! वाणी में सरस्वती का बास । सबको झंकृत कर दिया। अशोक चारण जी ने राजस्थान के वीरता के प्रतीक को मंच पर ही जीवंत कर दिया। नीट पेपर लीक को लेकर सरकार पर व्यंग वाण और राष्ट्रवाद की धारा साथ साथ बहा दी। और नीलोत्पल मृणाल जी, मुरैठा कवि । गांव का मुरैठा विद्रोह और श्रम शक्ति का प्रतीक है। खेत में बैल से हल जोतते हुए किसान के सिर पर हमेशा मुरैठा रहता था। जब गांव में किसी बात से विवाद हो अथवा प्रतिकार, विद्रोह हो और आउ त आउ हो जाये, तो सबसे पहले मुरैठा बंधाता है। मृणाल जी ने अपनी वाणी की अप्रतिम ऊर्जा से इसी विद्रोह को शब्द से साधकर सिंह गर्जना की। सबको अभिभूत कर दिया। और आदरणीय डॉक्टर सरिता जी... मित्र गणनायक जी ने उनके लिए माँ सरिता लिखा है बस..... कवि सम्मेलन की इस महती जिम्मेवारी को मंच पर उतारने में सहयोग करने वाले सभी का हृदय से आभार...

Featured Post

काव्य की स्वर लहरी