08 नवंबर 2026

दिवाली, धनतेरस और हंगर इंडेक्स

दिवाली और धनतेरस और बाजारवाद

दिवाली और धनतेरस पर बाजार में ठसाठस भीड़ रही। सब कुछ बिक गया। बाजार में इतनी भीड़ उमड़ी कि कहना मुश्किल। हंगर इंडेक्स में भारत कुल 122 देशों में 100 वें नंबर पर है। यह कितना बड़ा झूठ है यह दिवाली बता देगा। असल में हंगर इंडेक्स विदेशी एनजीओ का डाटा होता है। बस, एक साजिश । 

खैर, इस सब के बीच पिछले कुछ सालों में बड़ा बदलाव आया है। यह बाजारवाद है। यह कितना आश्चर्यजनक है कि दिवाली और धनतेरस पर सोना, चांदी, गाड़ी, घोड़ा और मंहगे उपहार खरीदने की कोई परंपरा नहीं थी। आज यह आवश्यक शर्त है। 

दिवाली भी बदल गई। अब बहुत कुछ कृत्रिम हो गया। धारौंद (घरकुल्ला) से लेकर बंदनवार तक। मिट्टी का दीया जलाने का जुनून अब खत्म हो गया। अब सोशल मीडिया पर कोई संवेदना दिखाता हुआ , नहीं दिखता। अब वही चाइनीज टिमटिमैआ छत पर है।


धनतेरस का सीधा सरोकार को धन्वन्तरि जी की जयंती से है। और धन्वन्तरि का सीधा और सामान्य संबंध हमारे स्वास्थ्य से है। पर बाजारवाद ने ऐसा खेल रचा कि आज धनतेरस और दिवाली का मतलब आभूषण खरीदने से है। विज्ञापन भी आजकल ऐसा दिखा जा रहा जैसे पति यदि आभूषण खरीदने में असमर्थ हो तो फिर उसका प्रेम निरर्थक और झूठ है। विज्ञापन देख आभूषण न खरीदने वाला बेचारा पति हीनता से भर जाएगा। 


असल में धन्वन्तरि जी ने जिस धन को धनतेरस से जोड़ा है वह हमारा स्वास्थ्य है, न कि सोना, चांदी। स्वास्थ्य को हो सबसे बड़ा धन संपत्ति माना गया था। आज स्वास्थ्य को हम धन मानते ही नहीं..
आज तनावपूर्ण जीवन शैली में ब्लड प्रेशर, डायबटीज, हाइपरटेंशन के साथ साथ ही आँखों से नींद भी गायब है। और हम कृत्रिम धन संचय के लिए बाजार से कुछ न कुछ खरीद कर झूठ मूठ के मुस्कुराते हुए तस्वीर को सोशल मीडिया पर लगा के इति श्री कर लेंगे। बस

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