12 अगस्त 2026

भादो के गर्मी में हिरन मात जा हे..

भादो के गर्मी में हिरन मात जा हे..

देहाती कहावत है। और यह अभी सावन में भी चरितार्थ है। तीखी गर्मी है। सबकी अपनी अपनी समस्या है। किसान परेशान है। 
"रोपनी अब दु कट्ठा भी नै रोपो हो। पहले चार कट्ठा रोप दे हल। रोपनी मिले में भी मुश्किल हो। और ई लहा–लोट रौदा हो..की रोपा होत, रोपनी भाग गेल..!"
रोपनी की अपनी समस्या है। 

" खेत के पानी खल–खल करो हो। एक घड़ी गोर रख के देख लहो, खाल उतर जैतो...? "

और वातानुकूलित कक्ष से धान रोपनी का प्रतिशत बढ़ाने पर रोज मंथन हो रहा। अधिकारी लक्ष्य पूरा करने के लिए नीचे के कर्मी को हड़का रहे। 

वहीं सावन में वर्षा बहुत कम हो रही। 

पर एक सुखद समाचार यह है कि अब पिछले एक, डेढ़ दशक से किसान धान की रोपनी के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर नहीं है। अब हर खेत, खंधा में समर्सिबल बोरिंग है।  ट्रांसफार्मर और बिजली है। इसलिए धान का रोपा हो जाता है। 

मजदूर एक बड़ी समस्या है। रोपनी मिलना अब मुश्किल है। 

इसीलिए बड़े किसान अब सहरसा से रोपना (पुरुष) लाते है। उसके रहने, खाने की व्यवस्था देते है। वह बहुत काम निकालता है।

और हां, खेत की मेड़ तक बिजली पहुंचाने की योजना का शुभारंभ मनमोहन सिंह की सरकार ने ही किया था। मुझे अच्छे से याद है। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना। बस इतना ही, बाकी सब ठीक है।