08 नवंबर 2026

कुर्सी और कुत्ता

कुर्सी और कुत्ता

आपको यह चित्र देख बेचैनी हुई होगी। होना ही चाहिए। आदमी बेचैन न हो, तो वह आदमी कैसा..! पर यह किस्सा कुर्सी का है। कुत्ता आदमी के साथ रहते-रहते आदमी का गुण अपना लेता है। आदमी कुत्ता के साथ रहते-रहते कुत्ता का एक भी गुण नहीं अपना सका। 

अब देखिए, आदमी के सासरंग का असर है कि कुत्ता को भी कुर्सी से प्रेम हो गया। होना ही चाहिए। इसे भी कुर्सी की ताकत का भान हो गया होगा। 

इसने भी देखा होगा कि कैसे लिच्चड़ आदमी भी कुर्सी पर बैठता है तो लोग उसका सम्मान करने लगते है। दंडवत प्रणाम करते है। 
इसने देखा होगा कि कल तक इसके इसके हिस्से की रोटी का टुकड़ा भी चुरा कर जो खा जाता था, आज कुर्सी पर बैठ कर संत, महात्मा कहलाता है। 

इसने देखा होगा कि कैसे कल तक राह चलते कुत्ता को ढेला मार कर जो टांग तोड़ प्रतियोगिता करता था, आज कुर्सी के लिए कुत्ता प्रेमी का स्वांग करता है। लोग उसका जय-जय करते है। 

इसने देखा होगा कि कैसे कसाई के यहां गाय बेचने वाला कुर्सी के लिए गौ प्रेमी बन गया है। गाय की पूजा का स्वांग करता है। गोशाला में जाकर गाय की आरती उतारता है। और लौटते ही गाय के दान में मिला चारा बेच कर, उससे गौ माता का एक प्रतिमा लगाता है। पूजा करता है।

यही सब देख इसका मन मचल गया। अब यह कुर्सी को छोड़ता ही नहीं है। बाकी सब ठीक है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Featured Post

कुर्सी और कुत्ता