स्वयंभू भगवान
घोषित होने हेतु
अपने पराये को
निकृष्ट, पापी, कलंकिनी
घोषित करना ही पड़ता है
मर्यादापुरुषोत्तम होने के
लिए स्त्री की अग्निपरीक्षा
लेनी ही पड़ती है
कलंकिनी हो वनवासिनी
सीता के लिए
कल धरती फटी थी
और वह उसमें समा गयी
आज की सीता
भी हमारे आसपास
कलंकिनी घोषित हो
अग्नि में समा जा रही
और हम
मर्यादापुरुषोत्तम
बने पूजनीय हो
जाते है..
काश की सीता के लिए
धरती नहीं फटती
और वह जीवित रह
नारी सशक्तिकरण
का प्रतीक बनती
तो जाने कितनी
सीता आज जीवित
रहती....