नीट छात्रा की हत्या और दुष्कर्म में अपना अपना टार्गेट
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नीट छात्रा की हत्या और दुष्कर्म मामले में सभी ने अपना अपना टार्गेट सेट कर लिया है। आजकल, ईमानदार और साहसी होने के दावे हम स्वतः करते है। और हमेशा की तरह सोशल मीडिया में कुछ वाह वाही करते हैं तो कुछ गाली देते हैं।
होना यह चाहिए था कि इस बड़े आपराधिक नेटवर्क को सामने लाने के लिए सारे उपाय किए जाते। साक्ष्य जुटाए जाते। हो यह रहा है कि कहानियां सुनाई जा रही। यहां तक कि छात्रा का चरित्र हनन किया जा रहा। और हो यह रहा कि सभी ने अपना अपना टार्गेट सेट कर किया है। हो यह रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का धज्जियां उड़ाते हुए व्यू और कमेंट के लिए छात्रा की पहचान, उसकी तस्वीर को उजागर कर दिया गया।
हद तो यह है डॉ सहजानंद को टारगेट में ले लिया गया है। जबकि उनकी सहभागिता जितनी होनी थी, वह एक सामान्य चिकित्सक के लिए उचित ही है। पर टारगेट करने का अपना टारगेट होता है। बस वह पूरा हो, यही टारगेट है..!
इस सबके बीच इसमें गर्ल्स हॉस्टल संचालक और मकान मालिक का अवैध और नैतिक नेक्सस, पटना में देह व्यापार में इनकी सहभागिता। इसके राजनीतिक संरक्षण और नेक्सस में राजनीतिक नेटवर्क पर बहुत कम तथ्य आ रहे। जबकि मूल यही है। और पटना से जुड़ा हर आदमी इसे जान, समझ रहा है। हालांकि दैनिक भास्कर ने इसे स्ट्रिंग ऑपरेशन में खुलासा भी किया। असल काम यही करने का है।
अब आइए केस अनुसंधान पर। एसआईटी ने अपने अनुसंधान को गर्ल्स हॉस्टल से शुरू करके जहानाबाद पर केंद्रित किया है। मतलब, कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ी है। जिसपर सभी चुप है।
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अब, सरकार और पुलिस की शाख पर प्रश्नचिन्ह है। पहले दिन से ही यह लगा जैसे पुलिस अपराधियों के बचाव में हो। अब भी यही लोगों की धारणा है कि सब लीपापोती हो जाएगा। कोई बलि का बकरा बनेगा।
यह सबसे चिंता का विषय है। इसका व्यापक असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ेगा। कोई अपनी बेटी को पटना भेजना नहीं चाहेगा।
गृह मंत्री सम्राट चौधरी का कोई प्रयास नहीं दिखता। बल्कि लोग मान रहे है कि यह नेताओं का भी नेक्सस है। इसीलिए नेता इसमें हरसंभव बचाव में ही काम करेगा।
नीलम अग्रवाल को छोड़ दिया जाना, बर्डेन का गुम हो जाना, बंगाल की लड़की का रहने का कथित दावा, दैनिक भास्कर अखबार के डिजिटल के स्ट्रिंग ऑपरेशन में गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों का देह व्यापार में संलिप्त होने का नेक्सस... छात्रा के शरीर पर जख्मों के निशान, प्रभात हॉस्पिट में मामले को दबाने के लिए 15 लाख का ऑफर, कमरा को साफ किया जाना, कितने प्रश्न है, और उत्तर किसी का नहीं है। जवाब कौन देगा...
उम्मीद है, बिहार पुलिस के डीजीपी विनय कुमार, एडीजी कुंदन कृष्णन, एस आई टी और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा इस गुत्थी को प्रमाण के साथ सुलझा कर बिहार की पुलिस से लोगों के टूट रहे भरोसे को टूटने से बचा ले...
सटीक विश्लेषण। घटना पर क्या कहें सर मन दुखी है।
जवाब देंहटाएंसादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २३ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
हर जगह गड़बड़ी है | बिहार से लेकर उत्तराखंड |
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