गोपाल जी से झमा के साथ—
क्या हम आत्महत्या कर लें।
मेरी मंशा किसी को ठेंस पहूंचाने की नहीं थी और न ही मैं हिंसा का समर्थक
हूं पर गोपाल जी के ब्लॉग http://gap-shapkakona.blogspot.com/
को पढ़ने के बाद अनायास ही जो लिखना प्रारंभ
किया वह रूका ही नहीं और इसलिए ही लिखता चला गया। मैं गोपाल जी से क्षमा
प्रार्थी हूं। मैं वह नहीं कि अपनी को आदशवादी कहलाने लिए माक्र्स को
जानने का दबा करू और वामपन्थी कहलाने का दंभ रखूं पर जो मेरी समझ है वही
मेरा ब्लॉग है, मैं तो बस यह कहना चाहता हूं कि किसी भी समस्या को समझकर
कर ही उसका समाधान किया जा सकता है और बिना समाधान के कोई समाज आगे जा भी
नहीं सकता। नक्सलवाद एक समस्या है जिसके लिए दोषी कोई तो होगा। मूल में
अपना समाज है और सरकार भी पर सबसे मूल समाज जो नक्सलवाद को समझना ही नहीं
चाहता। नक्सलवाद जिस समस्या का नाम है हां वह हिंसा फैलाता है, रेल पूल
उड़ने सहित नृसंस हत्या भी करता है और इसका कोई सभ्य समाज समर्थन नहीं कर
सकता तब इससे क्या होगा अगर हमारा शरीर बीमार होगा तो कहीं न कहीं तो वह
प्रकट होगा ही जो की किसी को अच्छा नहीं लगता तब क्या हम बीमारी को ठीक
करने के लिए आत्महत्या कर लें।.........
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गोपाल जी के ब्लॉग का लिंक भी दिजिये तो बात समझना और सरल हो जाये.
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