लोकतंत्र नहीं, लहर तंत्र है..
नवादा लोकसभा सहित कई क्षेत्रों से कौन उम्मीदवार होंगे अभी तक पता नहीं!! चुनाव में मात्र 25 दिन बचे हैं। जो नेता जी आएंगे वे कौन-कौन से गांव जा पाएंगे? सोच कर देखिए! गांव अगर जाएंगे भी तो क्या वे किसानों का दर्द सुन सकेंगे? क्या गांव के लोग उनको बता सकेगें कि पीने के लिए पानी नहीं है। खेतों में सिंचाई का कोई साधन नहीं है। गांव की सड़क नहीं है। नेताजी के पास इतनी फुर्सत भी नहीं होगी।
मोदी लहर में शायद सब कुछ डूब जाएगा। महागठबंधन के तरफ से भी प्रत्याशी तय नहीं है। यह लोकतंत्र नहीं लहर तंत्र में बदल गया है। जिसे ऊपर से तय करके भेजा जाएगा मजबूरन आप से वोट दीजिए।
प्रत्याशियों को जांचने-परखने, सुनने-समझने, बोलने-बतियाने तक का समय आपको नहीं दिया जाएगा। यह कैसा लोकतंत्र है।
परंतु इस सब के लिए दोषी हम वोटर ही हैं। धर्म, जाति, उन्माद इसी सब पर वोट देना है। रोटी, रोजगार, महंगाई इन सब मुद्दों से कोई मतलब नहीं है। ना तो नेताजी को मतलब है और ना ही जनता को।