10 अक्टूबर 2026

तानाशाही नहीं चलेगी । हाय-हाय, हाय- हाय।

तानाशाही नहीं चलेगी । हाय-हाय, हाय- हाय। यह तो तानाशाही है। घोषित आपातकाल है। जुल्म हो रहा है, जुल्म। भला बोलिए तो, सबको पकड़ लिया। जहाज से भी उतरने नहीं दिया। जर्मनी से आने वाले को भी उठा ले गया। हद तो यह की दिल्ली के अभूतपुर्व बादशाह को भी घसीट लिया। और तो और, दीदी को भी पकड़ कर ले गए । इससे बड़ी तानाशाही क्या होगी। खेलावन काका बोलते जा रहे थे। रुक ही नहीं रहे थे । बहुत ही गुस्से में थे । उन्होंने कहा , सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए था । रेल, मेट्रो, बस, सड़क सब बंद कर दिए। और तो और, प्राण वायु, इंटरनेट को भी बंद कर दिया गया । जुल्म हो रहा है देश में, जुल्म। पहले जब आपातकाल लगा था तो कितनी उदारता थी। कितनी संवेदनशीलता थी। कितना न्यायप्रिय शासन था। और जब पहली बार कॉकरोच जंतर मंतर पर आंदोलन करने के लिए आए थे, वह आंदोलन कितना अच्छा था । संसद पर चढ़ने की तैयारी हो गई थी। लठ पर लठ चले थे। कितनों का माथा-कपार लाल-लाल हो गया था और मोबाइल के मायावी का कितना रील वायरल हुआ था। देश भर से मोबाइल के मायावी भी पहुंचे थे और तरह-तरह के डांस, तरह-तरह के गाने वायरल हुए थे। झेन झेन झी- ने कैसे-कैसे मधुर गीत गए थे । उनके कोकिल कंठ से देश के प्रधान के लिए कितने अच्छे-अच्छे बोल निकले थे। सभी का अंत:करण तृप्त हो गया था। और तो और देश भर में हुआ केस भी रद्द हो गया था। तानाशाही नहीं चलेगी । हाय-हाय, हाय- हाय। खिलावन काका बोलते ही जा रहे थे, रुक ही नहीं रहे थे।

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