28 अक्टूबर 2026

हरसिंगार का समय आ गया है...

हरसिंगार का समय आ गया है...

शाम ढलते ही इसकी भीनी-भीनी खुशबू मन में ऐसे घुलने लगती है, जैसे पानी में चीनी। एक ऐसी मिठास, जिसे महसूस करने के लिए किसी शब्द की जरूरत नहीं होती।
और सुबह... ओस में भीगे हरसिंगार के फूल धरती पर ऐसे बिखरे मिलते हैं, मानो किसी ने रात के अँधेरे में विवाह का मंडप सजाया हो। सफेद पंखुड़ियों पर केसरिया डंठल की आभा, जैसे सादगी ने अपने माथे पर सुर्ख तिलक लगा लिया हो।

हरसिंगार केवल खिलता नहीं, वह रात की नीरवता को सुगंध में बदलता है और सुबह धरती को फूलों की चादर ओढ़ा देता है।

कुछ फूल डालियों पर रहकर सुंदर होते हैं, कुछ धरती पर बिखरकर भी अपनी गरिमा बनाए रखते हैं।

हरसिंगार उन्हीं में से एक है... जो झरकर भी आँगन को महका देता है। 

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