08 जनवरी 2010
आलू पर अल्लाह-ओम एक साथ, आलू पर अल्लाह-ओम एक साथ (Sheikhpura)
सौहर्द का प्रतिका बना आलू
ईश्वर भी कहतें है हम एक है।
इसे आस्था कहे, अंधविश्वास कहें या कहे ईश्वर का चमत्कार पर यहां कुछ ऐसा
ही नजारा देखने को मिला है। शेखपुरा-जिले के बरबीघा थाना क्षेत्र के
फैजाबाद मोहल्ले में आज एक अदभुत नजारा सामने आया। हुआ यूं कि तैलिक
बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक अनवारूल हक के घर में जब उनकी पत्नी
खाना बनाने के लिए आलू काट रही थी तभी कटे हुए आलू में सड़ा होने का आभास
हुआ और जब वह उसे फेंकने के लिए जा रही थी कि उनकी नजर आलू पर उकरे
अक्षरों पर पड़ा और उसने उसे पढ़ने की कोशिश की तो वह आश्चर्यचकित रह गई।
आलू के कटे हुए भाग पर मोहम्मद और अल्लाह लिखा हुआ था। जब इसकी जानकारी
उसने अपने पति को दी तो उन्हें भी एकवारगी इस बात पर भरोसा नहीं हुआ और
उन्होंने कई अन्य लोगों से इसकी तस्दीक की तो सभी ने इसे पढ़ा तथा यह
अरबी भाषा में लिखे होने की तस्दीक हुई। इस बात की खबर मिलते ही लोेगों
का तांता उनके आवास पर जमा होने लगा और बाद मेें जब आलू के कटे हुए भाग
को फिर कई लोगों ने गैर से देखा तो उस पर उं (ओम) लिखा हुआ था जो थोड़ा
धुंधला था। इस बात की जानकारी के बाद लोगबाग इसे ईश्वर का करिश्मा मान
रहें है। मदरसा में तैनाता अरबी भाषा के तालीम देने वाले मौलबी ने भी
इसकी तस्दीक की तथा इसे अल्लाह का करम बताया। यह बात चाहे आस्था हो या
अंधविश्वास पर आलू पर अल्लाह और ओम एक साथ लिखे होने की बात को जानकर
लोग इसे ईश्वर का करिश्मा ही मान रहें है। इस पूरे मशले पर मेरा अपना कोई
मत नहीं है मैंने जो देखा वह यहां रख रहा हूं।
06 जनवरी 2010
याद किए गये शिक्षाविद लालाबाबू
बरबीघा, शेखपुरा, बिहार
महान शिक्षाविद्, सांसद एवं स्वतंत्रता सेनानी श्रीकृष्ण मोहन प्यारे
सिंह उर्फ लाला बाबू की 108 जयंती पर शिद्दत के साथ उन्हें याद किया गया।
इस अवसर पर उनके अथक प्रयास से स्थापित एस.के.आर. कॉलेज में समारोह का
आयोजन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डा. रामजी सिंह
ने की। इस अवसर पर उन्होने कहा कि लाला बाबू महान शिक्षा प्रेमी और
समाजसेवी थे तथा उनके आचरण को अपना कर देश और समाज में परिवर्तन लाया जा
सकता है। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य डा. नागेश्वर सिंह ने कहा कि लाला
बाबू शिक्षा और समाज सेवा से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणाश्रोत है। इस
अवसर पर प्राचार्य डा. गजेन्द्र प्रसाद, प्रो. हरिनारयण गुप्ता, प्रो.
भवेशचन्द्र पाण्डेय सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। इस अवसर पर कॉलेज का
वाषिकोत्सव भी मनाया गया। शिक्षाविद् लाला बाबू को उनकी जयंती पर उनके
पैतृक गांव तेउस स्थित उच्च विद्यालय में भी समारोह पूर्वक याद किया गया।
इस अवसर पर सांसद भोला सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि
सांसद लाला बाबू ने शिक्षा और समाज सेवा का अलख जगा कर जो मिशाल कायम की
उसे संभाले रखने की महती जिम्मेवारी हम सबों के कंधे पर है। सांसद ने कहा
कि समाज सेवा की जो राह लाला बाबू ने बनाई उसे आज के लोगों ने भुला दिया।
इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि प्रो. रामविलास सिंह, उमेश सिंह, मुरारी सिंह
सहित अन्य लोग मौजूद थे। समारोह की अध्यक्षता विद्यालय प्रबंधकारिणी
सदस्य प्रो. सुधीरमोहन शर्मा ने की।
पत्रकार के घर लाखों का डाका
शेखपुरा, बिहार
नया साल के आगमन का आगज बरबीघा में नए अंदाज में हुआ और चोरों में पुलिस
को खुली चुनौती देते हुए दैनिक जागरण के संवाददाता रामजनम प्रसाद सिंह के
घर चोरी की घटना को अंजाम दिया। इस घटना में दस लाख की संप्पती चोरी होने
का अनुमान लगाया जा रहा है। घटना बीती रात को घटी जब पत्रकार रामजनम
प्रसाद सिंह अपने सभी परिवार के साथ देवघर बाबा भोला के दशन के लिए गए
हुए थे तथा घर में कोई नहीं था। चोरों ने मुख्य दरवाजे का ताला तोड़ घर
में प्रवेश किया तथा उसके बाद सभी कमरे का दरबाजा बारी बारी से तोड़ दिया
एवं गोदरेज का दरबाजा तोड़कर उसमें रखा जेवरात सहित नकदी लूट लिया। घटना
का पता पड़ोसियों को सुबह में तब लगी जब उन्होने घर का दरवाजा खुला पाया।
घटना की जानकारी पुलिस को दी गई उसके बाद पुलिस के द्वारा इसकी छानबीन की
जा रही है तथा चोर को पकड़ने के लिए डॉग स्काउड की मदद ली जाएगी। इसके
लिए पटना से प्रशिक्षित कुत्ता को मंगाया जा रहा है जिसके द्वारा चोरों
को पकड़ने में पुलिस की मदद की जाएगी। चोरी की घटना को अंजाम देनेवाले
चोर की एक गमछी भी घटनास्थल पर पाई गई है जिसके आधार पर चोर को पकड़ने का
काम किया जाएगा। उधर फैजाबाद मोहल्ले में भी एक किराना दुकान का ताला
तोड़ चोरों ने दुकान में रखा सारा सामान चुरा लिया तथा सामाचक मोहल्ले
में भी चोरों ने दुकान का ताला तोड़ चोरी की घटना को अंजाम दिया। हलांकि
इस मामले की छानबीन के लिए डॉग स्काउड मंगाया गया पर उसके द्वारा भी कोई
ठोस पहचान नहीं दी गई।
04 जनवरी 2010
पाती प्रेम की
तुम्हारे सौंदर्यबोध में मैंने बहुत से शब्द ढूंढे़
अपनी भावनाओं को कोरे कागज पर बारम्बार उकेरा
फिर उसके टुकडे़-टुकड़े किए
हर बार शब्द शर्मा जाते........
फिर इस तरह किया मैंने
अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त
गुलाब की अबोध-नि:शब्द पंखुड़ी को
लिफाफे में बंद कर तुम्हें भेज दिया..........
03 जनवरी 2010
आंखे
कुछ कहती है तुम्हारी आंखे।
क्यों प्रफुिल्लत होता है अंतर मन
जब मिलती है हमारी आंखे
क्यों अंत: की वेदना
सिमट जाती है
जब सामने होती है तुम्हारी चंचल आंखे
पता नहीं कोई बोत है
शायद प्रेम
जो कर बैठी है हमारी आंखे।।
01 जनवरी 2010
Featured Post
-
उसके बड़े बड़े स्तनों की खूबसूरती छुपाने के लिए सपाटा से उसी प्रकार कस कर बांध दिया जाता है जैसे गदराल गेंहूं के खेत में पाटा चला दिया गय...
-
आचार्य ओशो रजनीश मेरी नजर से, जयंती पर विशेष अरुण साथी भारत के मध्यप्रदेश में जन्म लेने के बाद कॉलेज में प्राध्यापक की नौकरी करते हुए एक चिं...
-
बिहार की शिक्षा नीति पर अक्सर सवाल उठते रहे है और परिक्षाओं में नकल यहां की परंपरा है। बिहार में शराब नीति और शिक्षा नीति दोनों आलोचना...



